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Showing posts from November, 2022

गाँव और शहर

 Those having background of village and now in city should try to reduce the poetic fight between city and village ...blame game and allegation against each other.... Those who do reside permanently in cities they can stay with no worry ..... Those who do stay in villages no stress but those who belongs to both village and city ...very tough to handle .... अनवरत वाकयुद्ध शहर और गाँव का चल रहा.... कोई कसर नहीं छोड़ते दोनों एक दूजे के टांग खिंचने मे!! जहाँ गाँव गुस्सा किए अपने भौंहे टेढ़ी किए हुए शहर पर!!! वही शहर भी कहाँ कम कोसने मे गाँव को!! आजकल तो और भी गुस्साए जा रहा गाँव!! ज्यादा लोगों को छोड़ते गाँव देख बेचारा दुखी गाँव है अपना!! माथा पीटता गाली देता है शहर को !! प्रदुषण की विभीषिका शहर मे फिर भी लोग!! चमक दमक के भीतर रोगों से लड़ते लोग फिर भी शहर!!! शुद्ध हवा छोड़ गंदी हवाओं को लालायित लोग!! भोले भाले मच्छर गाँव मे किंतु खतरनाक मच्छरों का बसेरा शहर फिर भी लोग!! गाँव कुंठित हो चले है बाग बगीचा भी मुँह लटकाये शहर को कोस रहे सब!!! मना लेना अपने गाँव को भाई  बोलना एक दिन सभी...

शहर से गाँव की ओर

 चल दिया एक भाई भूले बिसरे रिश्तों को छुने ! छु लेना भाई यही जीवन हैं !! कभी एक दांत की रोटी खानेवाले किन्तु मिलने का  वक्त बड़ी मुश्किल मिल जाया करती है आज!! यहां का नौकरी वाला जीवन भी देखना  किन्तु वहां बचपन से ही जुड़े रिश्तों को भी सहेज लो!! दूर दूर रहते रहते और खुद की जिम्मेदारियों में मशगूल  हम इंसान केवल बीबी बच्चों तक ही सीमित  हो लिया करते है!! कभी सोचो वो बचपन जब भाई संग खेलता रहा होगा  गाँव की गलियां रास्ते वो पेड़ पौधे वो खेत  तब के गुल्ली डंडा वाला गाँव अब कहाँ!! और आज जब मुश्किल से वक्त निकल पा रहा  सही ही किसी ने बोला है हम मशीन से हो चुके है!! डरते हुए ही घुसना भाई गाँव यूँ ही क्रोधित होगा  तुम्हारे उप्पर!! शहरी लोगों से चिढ़ा चिढ़ा हुआ जो रहता है  गाँव हमलोगों के!! भारी गुस्सा रहता है शहर उप्पर हमारे गाँव!! नमन करते मिट्टी को माथे लगा लेना  पल भर ही सही सहला लेना गाँव को  शायद कुछ शांत हो जाए गुस्सा गाँव का!!! जब भी कोई गाँव जाता दिखता है शहर से  शहर और गाँव का वाकयुद्ध यूँ ही आ जाता है मन मे! उधर से जब आओ...

प्यार मोहब्बत वाला आम आदमी

 पल दो पल के जीवन मे क्या गिला क्या शिकवा  ऐ राहगीरों प्यार मोहब्बत कर लो सबसे ! लड़ाई भी कर लेना एक पल की खातिर  किन्तु अगले ही पल देना बिसार उसे  प्यार मोहब्बत का कोई मोल नहीं ऐ राहगीर  जो मन की शांति इसमें है वो लड़ाई झगड़े में कहाँ  बहस भी कर लेना किन्तु मन मे ना रखना  भूल जाने की एक आदत डाल लेना तभी  सही जीवन जी पाओगे!!! कभी मन के कोने मे लेना झाँक  हँसी ठहाके और प्रेम इश्क से बड़ा और क्या  देखने से हँस लेने की कोशिश कर लेना  यही पल दो पल का जीवन है!! कुछ भी यहां से नहीं ले पाओगे  सब छोड़ यही चले जाओगे फिर काहे का गिला  काहे का शिकवा!!! हम तो आम आदमी ठहरे ग़लतियाँ भी  अच्छे काम भी सब करते रहनेवाला आम आदमी  ना हम देवता ना हम भगवान और काहे का diamond  केवल आम मनुष्य!! सबके दिलों को जीतने की कोशिश करनेवाला  प्यार मोहब्बत की खुशबु का पैगाम देनेवाला  केवल एक आम आदमी!! पल महिने साल देखते सीखते सीखते  प्यार का पैगाम देता एक आम आदमी ही तो हूं! Diamond तो हमारे kutty सर है इस समूह का  कोई पुर...

पल और मनुष्य जीवन

 अनेकों पल फिर ये मनुष्य जीवन  कितने फेज से गूजर के ये जीवन  लड़ते झगड़ते हँसते हँसाते कई रंग  सुख के पल दुख के पल  रोमांस के पल पश्चाताप के पल  दोस्तों संग पल खेलते हुए पल  स्कूल वाला पल बचपन वाले पल  मीठे और  सुनहरे  पल बचपन के  वो पल दूसरे थे ये पल दूसरा है  यही मनुष्य जीवन है!! आज के मशीन रूपी दौड़ते ये पल  आरोप प्रत्यारोप करते ये पल  लगातार दौड़ते और दौड़ते कुछ और  करने की तमन्ना लिए... ये कभी खत्म ना होनेवाली भागमभाग  इगो का खजाना लिए ये पल  हम बड़े तुम छोटे के भाव तले ये पल  शायद यही मनुष्य जीवन का सार!!

घमण्डी और बेवकूफ़

सदा घमंड में चूर रहनेवाला बेवक़ूफ़ इंसान  व्यंग्यात्मक हंसी और व्यंग्य को अपनी ताकत  समझता रहा और जीवन मे चलता रहा ! सदा एक ईर्ष्या से ग्रसित अपने में मशगूल  किन्तु समझता निज को सबसे बड़ा धर्मात्मा  अरे मुर्ख राहगीर जिवन को खुलकर जी लेना  खुद जैसा सबको समझ लेना या कहीं बेहतर  अपने को भगवान या धर्मात्मा समझना छोड़ देना  तुम भी एक आम आदमी हो!! दो हाथ पैरों वाले तुम्हारी कोई औकात नहीं  खुद को सबसे अच्छा सबसे बड़ा ज्ञानी  दूसरों को छोटा छोटी जाति का छोटे धर्म का  जैसा कीड़ा दिमाग में रखते हों!!! इंसान को इंसान समझना ऐ घमंडी मनुष्य  रिश्तों को कितना सहेज पाए हो वही असली धन है  अपनी बीबी बच्चों के अलावा भी कुछ रिश्ते होत है  लेना सहेज उनको रखना ध्यान उनका भी  तभी ये मनुष्य जीवन सार्थक है!!!! सच पूछो तो मनुष्य जीवन होत अकेला है  रिश्ते नाते होने चाहिए होते है इंसानों संग  किन्तु अकेला रहना शकुन देता है ना बहस  ना प्रश्नों की बौछार ना व्यंग्य बातें !!! इंसान अकेला आया है अकेला ही जाएगा  यही सच है जिवन का!!...

मुर्ख मनुष्य

पल दो पल का ये जीवन है ऐ नासमझ मनुष्य... भरपूर मोहब्बत खुद से खुद को कर लेना  कैसा अहंकार कैसा घमंड कैसी इगो  अपने भीतर ही खुश हो लेना  अच्छे काम अच्छी सोच के साथ रहना  कौन क्या सोचता ज्यादा ना सोचना  खुद को अपने आईने में देख लेना  क्यूंकि अपना मन सबसे बड़ा जौहरी होत है! अपना आकलन करते किसी और से नफरत ना कर लेना ऐ मुर्ख इंसान ! ना ही अपने को भगवान समझ लेना  और ना  ही बाकियों को बुरा इंसान ! अरे मुर्ख मानव खुद को प्यार करना जी भर! दूसरों को उपदेश ना देना सदा  अपनी सोच को इतना बड़ा रखना  छोटी सोच या छोटी बातों की कोई जगह ही ना रहे!! व्यंग्य करते करते दूसरों पर कहीं  खुद की पहचान एक बुरे इंसान की ना बना लेना ऐ नासमझ मनुष्य!!! व्यंग्य तभी तक ठीक जब तक अच्छा लगे  किन्तु सदा व्यंग्य और व्यंग्यात्मक हँसी  कहीं बुरा इंसान ना बना डाले!!

लफंगों की भाषा

 नहीं आती लफंगों की भाषा हमे  हम तो प्यार मोहब्बत की भाषा वाले  लफंगों को उनकी भाषा उन्हें ही मुबारक  चिर फाड़ की बात करनेवाले मुबारक हो उन्हें  मेरी शालीनता ही काफी है अपने देश खातिर  दलितों को उनके घरों में घुस नपुंसकता दिखाने की  ये भाषा हो या कम्युनिस्ट चरित्र वालों से नफरत  ये लफंगों की भाषा नफरती लोगोँ को मुबारक!! शिक्षा और मानवतावादी की बातें समझना  इनके बूते की बात नहीं.! हम तो प्यार मोहब्बत की बड़ी सोच वाले  नफरती सोच वालों से कोसों दूर ही सही!! शिक्षा जगत संग जुड़ाव और नफरत की भाषा  कभी कभार घिन भी तो कभी तरस भी आत है!! जहाँ बच्चे इंसान बनने आते पढ़ाई संग !! वहां भी नफरत का आलम!! हम ठहरे प्रेमी और देशप्रेमी मानवतावादी  इतिहास उठाकर देख लेना हमेशा ही ये राक्षसी  और लफंगों भाषा वाले नफरत फैलाने वाले  पराजित किए गए है प्रेम रूपी हथियार से!!! झूठे रामराज्य की बात करनेवाले मतलब भी नहीं  जानते होंगे मर्यादापुरुषोत्तम की राजनीति और उनकी बातें  उनके काम जो उचित अनुचित आधारित तब  मनुवादी मानसिकता से ग्...

आम आदमी और मैं !

 एक आम आदमी किन्तु तूफान लिए घूमता हूं  बहुत समय मौन भी जरूरी अगले दंगल खातिर  दिल जीतने की कोशिश वाले हम  मन्दिर मस्जिद गिरिजाघर भीतर ही लिए घूमते है  मन के भीतर ही ये सभी एक साथ घूमते है  स्वतन्त्रता सेनानी का बेटा  हूं तूफान लिए घूमता हूं  देशभक्ति की कूट कूट के भावनाओं का कोई प्रमाणपत्र  ना चाहिए किसी फेंकने वाले झूठे जुमलेबाजों से  मैं ओडिशा या बिहार या राजस्थान या बंगाल नहीं .. पूरा हिन्दुस्तान लिए घूमता हूं और विचारो का तूफान लिए घूमता हूं!!! मौन हो जाया कर्ता हूं क्यूँ की दिलदार हूं !! प्यार मोहब्बत का पैगाम लिए चलता हूं  किन्तु प्यार मोहब्बत  को कमजोरी ना समझ लेना  मन मे विचारो का तूफान लिए घूमता हूं  जानबूझकर किसी को पीड़ा नहीं दिया करता  किन्तु परीक्षा लेनेवाले को विचारों का पैगाम दिया कर्ता हूं! दो हाथ पैरों वालों को इंसान देखा कर्ता हूं  मन मे तूफान सा अंगार लिए चलता हूं... विद्यालय को सबसे बड़ा मन्दिर मस्जिद गिरिजाघर  अंगीकार किया कर्ता हूं!!! दबंग जाती में पैदा हुआ फिर भी इंसान बना फिरता ...

अज्ञानी व मुर्ख

 नफरत की किताब लिखते लिखते  जीवन को ही नफरत से भर डाला क्या  चलते चलते इस जीवन मे कभी समय निकाल सोच लेना ऐ राहगीर!! दिमाग में नफरत डालते डालते किसी ने सचमुच nfrati बना डाला क्या! ऐ नासमझ राहगीर ये जीवन प्रेम है  ये जीवन मोहब्बत का पैगाम ही तो है  कहीं पड़ोसी को nfrati बनता देख  खुद को नफरत से भर ना डालना  अपने बच्चों को को भी प्रेम का पाठ ही पढ़ाना ऐ नासमझ राहगीर!! दो हाथ पैर वाले इंसान भटक ना जाना  बड़े प्यार से प्रभु ने बनाकर धरती पे भेजा होगा !!.. यूँ ही नफरत में ही जीवन को ना बर्बाद कर लेना..... कभी अपनी जातीय अहंकार तो कभी झूठे धर्म के आधार पर अपने को विशेष समझने वाले नादान व मुर्ख मनुष्य.... तुम्हारी कोई औकात नहीं... एक बीमारी के झोंका में दम तोड़ देते हो एक पल में फिर भी अहंकार किन्तु क्यूँ!! Corona का डराता रूप देखके भी कोई अहंकारी नम्र विनम्र नहीं हो पाया तब वो मुर्ख व नासमझ राहगीर है.... उसका जीवन अर्थहीन है.!! ऐसे नासमझ जीते हुए भी मरे जैसे है!!! अरे कल्पना में ही किसी की आँखों से  किसी के रूप मे डूब मोहब्बत कर लेना  ऐ मुर्ख इ...