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दर्दे बयां

नहीं जान पाया अभी भी क्या है  ये मनुष्य जीवन! दर्द तो बहुत तो होत इस जीवन में  किन्तु कुछ दर्द इतनी असहनीय पीड़ा  देंगे ना था इसका इल्म... ना जी पाता हूं ना ही मर पाता  ऐसी कशमकश ना देखा था ना सुना था! मासूम प्यारा जब कोई अपना छोड़  चला जाता है वो भी अचानक.... मानो सुनामी आ गया हो जीवन में ! शब्द भी नहीं जिस दर्द को बयां खातिर  पापा तुम ना होते तो कौन सेवा करता मेरा  जैसे शब्द मेरे कानों को  या मस्तिष्क को  खा जाने को बेताब हो मानो ! क्या करूं उन यादों का उन लम्हों का  नहीं जान पाया अभी भी क्या है  ये मानव जीवन और माया मोह.... अनगिनत सपने देखता एक मासूम जो  जीवन ही नहीं देखा अभी पूरा  पापा अभी तो मैं चौदह साल का ही हुआ  जीवन देखा ही नहीं जैसे शब्दों का क्या करूं  मानो खुद को खुद से निगल लेने की मिन्नत  भगवान से कर रहा हूं मैं...... जीवन अकेला मन अकेला यही सत्य है  फिर भी जीवन अनवरत चलता जा रहा  अचानक ब्रेक लगा प्रभु की ये कौन सी लीला  मानो अचानक ब्रेक लग गया हो गाड़ी में  फिर गाड़ी पलट गय...