अज्ञानी व मुर्ख
नफरत की किताब लिखते लिखते
जीवन को ही नफरत से भर डाला क्या
चलते चलते इस जीवन मे कभी समय निकाल सोच लेना ऐ राहगीर!!
दिमाग में नफरत डालते डालते किसी ने सचमुच nfrati बना डाला क्या!
ऐ नासमझ राहगीर ये जीवन प्रेम है
ये जीवन मोहब्बत का पैगाम ही तो है
कहीं पड़ोसी को nfrati बनता देख
खुद को नफरत से भर ना डालना
अपने बच्चों को को भी प्रेम का पाठ ही पढ़ाना ऐ नासमझ राहगीर!!
दो हाथ पैर वाले इंसान भटक ना जाना
बड़े प्यार से प्रभु ने बनाकर धरती पे भेजा होगा !!..
यूँ ही नफरत में ही जीवन को ना बर्बाद कर लेना.....
कभी अपनी जातीय अहंकार तो कभी झूठे धर्म के आधार पर अपने को विशेष समझने वाले नादान व मुर्ख मनुष्य....
तुम्हारी कोई औकात नहीं...
एक बीमारी के झोंका में दम तोड़ देते हो एक पल में फिर भी अहंकार किन्तु क्यूँ!!
Corona का डराता रूप देखके भी कोई अहंकारी नम्र विनम्र नहीं हो पाया तब वो मुर्ख व नासमझ राहगीर है....
उसका जीवन अर्थहीन है.!!
ऐसे नासमझ जीते हुए भी मरे जैसे है!!!
अरे कल्पना में ही किसी की आँखों से
किसी के रूप मे डूब मोहब्बत कर लेना
ऐ मुर्ख इंसान एक पल का ही क्यूँना हो
रोते बिलखते जन्म हुआ होगा वैसे ही चले जाओगे....कुछ ना साथ ले जाओगे....
प्यार कर लेना सबसे ऐ नासमझ.....
जो आनंद प्रेम प्यार मोहब्बत इश्क में
वो भला नफरत लफंगई गुंडागर्दी में कहाँ
Aajkal Ka Pyar Ham
ReplyDeletemachharon ki tarah ho
gaya hai jab tak allout chalta
hai tab tak pyar chalta hai..!