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Showing posts from March, 2022

भागमभाग

 चलते चलते इतना दूर आ गया हूं क्या है ये जीवन अभी भी ना जान पाया हूं रोते हंसते लड़ते झगड़ते चलते चलते  कभी खुद से लड़ते कभी दूसरों से लड़ते ये कर लूं वो कर लूं ये नही कर पाया मंजिल जीवन की खोजते खोजते यहां तक  सब यही छोड़ चले जायेंगे फिर भी भागमभाग कुछ भी ना जाएगा यहां से फिर भी इतनी बेचैनी इंसानी नस्ल के हमलोग फिर भी ये धर्म ये जाती हम बड़ी जाती वाले तो हम बड़े ज्ञानी  हद्द है हम इंसानो की कहानी चलते चलते इतनी दूर आ गया हूँ फिर भी ये जीवन को ना जान पाया हूं जाना सबको है इस जीवन को छोड़के एक दिन ये जानते हुए भी एक दूजे से इतनी नफरत इतनी भागमभाग इतनी बेचैनी इतनी मायामोह बहुतेरे अज्ञानी भरे पड़े है आसपास ऐसे।।।

वाकयुद्ध

गांव बोला शहर से  ओ  भाई तुम इतने गंदे कलुषित से क्यों  तुम्हारी हवा इतनी गंदी क्यों।। कितने लाड़ प्यार व नजाकत से पाल पोस के  भेजता हु अपने बच्चों को शहर कुछ ही सालो में तुम क्या से क्या कर देते हो  उन प्यारे दुलारे मेरे बच्चों का।। ऐ शहर बहुत इतराते हो निज के उप्पर क्या है तुम्हारे पास जिसपे इतनी इतराहत हुआ करती है तुम्हारे दिलो दिमाग मे।। शहर बोला गांव से.. ऐ भिखमंगा से दिखनेवाला गांव क्या नही है मेरे पास ये चमक दमक सुंदर दिखते सड़क स्कूल अस्पताल दौड़ती भागती लोगो की खुशहाल जिंदगी पैसों की बारिश से लबालब लोग ।। ऐ शहर मेरे भोले भाले बच्चों को बेईमान  बना देनेवाले शुष्क जीवन करनेवाले पैसों के पीछे दौड़ते दौड़ते खुद को भूल  जानेवाले इंसान बना बहुत बड़ा अत्याचार  किये जा रहे हो ऐ घमंडी शहर।। पैसों के पीछे दौड़ते दौड़ते कैसे मेरे बच्चों को  घूसखोर व भावना रहित बना देते हो फिर भी इतराते हो घमंडी शहर।। इतरा लेना जिस दिन मेरे जैसे साफ शुद्ध हवा के झोंके चला लेना अपने यहाँ इतरा लेना ऐ शहर जिस दिन मेरे जैसा  प्रेम रस लोगों बीच फैला लेना।। जिस दिन रिश्त...

आवाज़

  आज गांव की वो यादें वो मिट्टी की महक चिल्ला चिल्ला के पुकार रही आजा आजा शहर की घुटन वाली हवा को छोड़के .. ये चाटुकारिता व भागमभाग का जीवन वो शहर के जीवन को छोड़ आजा  नफरत व बेगाने का भाव यदि आ जाये पैसे की खातिर बेईमानो को देखते देखते यदि मन मे एक नफरत सी होने लगे  तब शांत स्निग्ध गांव की मिट्टी मैं  बाहें फैला इंतेज़ार करती मिलूंगी।। चेहरे पे एक बेईमान भरी हंसी से यदि मन विरक्ति से भर आये तब कर लेना याद  मेरे को ओ मेरे आँचल में पलनेवाले अहंकारियों को देखते देखते जब मन  अजीज हो जाये तब याद कर लेना  मैं वही गांव की तरोताजा हवा सदा इंतेज़ार करती नजर आऊंगी।। जब अपने रिश्ते भी शहर में इतने व्यस्त  नजर आने लगे जब मिलने का वक्त भी ना हो  तब गांव का आँचल हमेशा तैयार  मिलेगा अपने आगोश में लेने को।। भले ही पैसा कम हो मेरे आँचल में किंतु शांत शीतल हवा के झोंके वैसे ही जैसा बचपन मे हुआ करता था।। मुख पे हंसी व भित्तर कल छल का  आभास यदि होने लगे तब दूर ही रहना ऐसों से और पुकार लेना मेरे को वत्स।। जब वक्त ठहरना बंद कर दे तुम्हारे शहर में तब याद कर ...