गाँव और शहर

 Those having background of village and now in city should try to reduce the poetic fight between city and village ...blame game and allegation against each other....

Those who do reside permanently in cities they can stay with no worry .....

Those who do stay in villages no stress but those who belongs to both village and city ...very tough to handle ....

अनवरत वाकयुद्ध शहर और गाँव का चल रहा....

कोई कसर नहीं छोड़ते दोनों एक दूजे के टांग खिंचने मे!!

जहाँ गाँव गुस्सा किए अपने भौंहे टेढ़ी किए हुए शहर पर!!!

वही शहर भी कहाँ कम कोसने मे गाँव को!!

आजकल तो और भी गुस्साए जा रहा गाँव!!

ज्यादा लोगों को छोड़ते गाँव देख बेचारा दुखी गाँव है अपना!!

माथा पीटता गाली देता है शहर को !!

प्रदुषण की विभीषिका शहर मे फिर भी लोग!!

चमक दमक के भीतर रोगों से लड़ते लोग फिर भी शहर!!!

शुद्ध हवा छोड़ गंदी हवाओं को लालायित लोग!!

भोले भाले मच्छर गाँव मे किंतु खतरनाक मच्छरों का बसेरा शहर फिर भी लोग!!

गाँव कुंठित हो चले है बाग बगीचा भी मुँह लटकाये शहर को कोस रहे सब!!!

मना लेना अपने गाँव को भाई 

बोलना एक दिन सभी लौटकर आयेंगे तुम्हारे दर पर ऐ गाँव!!

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