पल और मनुष्य जीवन
अनेकों पल फिर ये मनुष्य जीवन
कितने फेज से गूजर के ये जीवन
लड़ते झगड़ते हँसते हँसाते कई रंग
सुख के पल दुख के पल
रोमांस के पल पश्चाताप के पल
दोस्तों संग पल खेलते हुए पल
स्कूल वाला पल बचपन वाले पल
मीठे और सुनहरे पल बचपन के
वो पल दूसरे थे ये पल दूसरा है
यही मनुष्य जीवन है!!
आज के मशीन रूपी दौड़ते ये पल
आरोप प्रत्यारोप करते ये पल
लगातार दौड़ते और दौड़ते कुछ और
करने की तमन्ना लिए...
ये कभी खत्म ना होनेवाली भागमभाग
इगो का खजाना लिए ये पल
हम बड़े तुम छोटे के भाव तले ये पल
शायद यही मनुष्य जीवन का सार!!
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