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Showing posts from December, 2021

चंडीगढ़ के नाम

 अनाड़ी ही समझते रहना हम आपियन्स को राजनीति का।। क्रांति की किताब हम यूं ही लिखते जाएंगे तुम्हारे दिमाग के नफरत को यूं ही मिटाते जाएंगे।। आम आदमी वो शब्द है वो प्रतीक है जिससे हर आदमी को बदलके रख देंगे ईमानदारी व काम का जुनून है इनमें जितनी बैठके करना हो कर लो  भ्रस्ट लोगो की।। किंतु जब आम आदमी ठान ले तब यही होत है ।। दिल्ली के बाहर की ये तस्वीर बहुत आनंदमयी है।। धर्म के नाम पे नफरत फैलानेवालों  चाहे हिन्दू वाले या मुस्लिम वाले  ।। हम आम आदमी जुनूनी आदमी ही  ठीक करंगे तुम्हारा नफरत ।। इसकी दवाई हम जैसे जुनूनी लोगो के पास ही है।। धर्म की आड़ लेके नफरत के सौदागरों इश्क़ व मोह्हबत से आम आदमी  ठीक करेगा तुम्हारी इस हरकत को।। रोज रोज लोगो के दिलो दिमाग से खेलनेवालों।। मीठा मीठा थोड़ा थोड़ा मन मे जहर घोलनेवालो ।। लेनेवालों को मालूम भी नही किस तरह  उनका दिमाग नफरती बना दिया गया है। ईमानदारी की ताकत से बेखबर लोगो ना रहना किसी गफलत में।। बड़े बड़े साम्रज्य को ध्वस्त होते देखा गया है इस ईमानदार नियत के सामने तुम नफरतियो की क्या बिसात।। आम आदमी को भ्रमजाल में रखनेवालों ...

परिचय जीवन का

जीवन व खुद को खोजते खोजते  वैसे ताउम्र नही समझ पाते कौन है हम फिर भी खुद को समझ लेने की जिद मानो जाने का नाम नही ले रही।। इश्क़ वाले वो जुनूनी पल भी क्या खूब थे वैसे जीवन मे कई कई बार ये इश्क़ होता रहता है एक बार इश्क़ केवल सिनेमा तक ही अच्छा वास्तविक जीवन मे ये कहाँ। कभी जिंदगी में अकेलेपन वाला पल अच्छा कभी दोस्तों बीच वाला पल अच्छा।। तो कभी अपने जुनूनी वाले वो पल अच्छे  जीवन खुद ही एक असमंजस की पतवार है कभी ये अच्छा कभी वो अच्छा।। सम्भवतः परिवर्तन ही सत्य है इस जीवन का एक ही जैसा एक ही हालात में कौन है रहता।। किंतु जीवन प्यार है दोस्ती है मुस्कुराहट है जीवन अकेला भी है सत्य है।। मन यदि आनंदित तभी जीवन अपना है  मन दुखी तो काहे का जीवन।। हंसी मुस्कुराहट खुले मन से मिलने की बातें मन मे चेट लिए जीवन जीने का क्या काम।। मन को खुलके अभिव्यक्त कर लो यही तो है।। अच्छे कर्मों से होता है ये मेरा परिचय जीवन का  क्रांति की एक मशाल सदा मन मे जलाए  जुनून की एक अविरल धारा हो मन मे ।। भूल जाने की कुछ कला हो मन मे  कल क्या हुआ जैसे याद ही ना हो।। अच्छे पलों को याद करके बुरो क...

एक दिन

 एक दिन आएगा जब मेरे को ना पाओगे जब हम जुदा हो जाएंगे मेरे को ना पाओगे केवल फ़ोन को निहारोगे किंतु मेरा कोई पैगाम  ना पाओगे।। यादों के झरोखे से ही मुझको देखोगे।। तब ना कोई रूठना ना कोई मनाना होगा  ना कोई गिला ना कोई शिकवा होगा तब।। मेरी गलियां मुहल्ला को देखोगे तब हमारी  यादें बहुत आएंगी किंतु मेरे को नही पाओगे। दो पल के इस जीवन को जी लो दिल खोल के क्या रूठना क्या मनाना क्या बिश्वास क्या अविश्वास।। बहुत सारे ऐसे जो जुदा हो चले गए ।। कभी लौटके फिर ना आये।। स्वार्थ परमार्थ की खोज बिन में इतना घुल ना जाना मन तो आज़ाद ही आता है इस जहां में उसको कैद करने के बहाने क्यों खोजते हो।। क्या बोला क्या किया क्या पाया क्या खोया इस सोच को अलविदा कर लेना दोस्त।। एक दिन ऐसा आएगा जब जुदा हो जाएंगे फिर कभी ना मिल पाएंगे।। जो आहसास  आता हो मन को  खूब मन भर जी लो उनके संग ।। ज्यादा डूबना ना जीवन के उस रंग में ।। मन को आनंदित कर लो जितना कर सको जी लो असल जीवन  रिश्तों संग।।

अकेला

 आया था अकेला इस धरती पे जाएगा भी अकेला फिर ये भागमभाग ये लूट लो वो लूट लो ऐसा क्यों ये अपना बना ले उसको छीन ले ये आशा ये निराशा ये बिश्वास कभी वो अविश्वास क्यों।। अकेला इस जहां में रहना ना कोई दर्द ना कोई शिकवा  ना रहेगा किसी से आशा ना कोई निराशा अकेला वाला जीवन था सुंदर अपने से बातें कर मुस्कुरा लिया करता था तब मन की बातें कविताओं में समेट प्रसन्न हो जाया  करता था तब।। इसका व्यंग्य वाण उसकी बातें ये बोला ऐसे बोला ना था कोई झंझट ऐ प्रभु इस जहां को बनानेवाले।। ये नाराज वो नाराज होने का क्या है इलाज अकेला जीवन लगता सबसे सुंदर जीवन झेल लेंगे कभी तूफान भी आये तो किंतु रोज रोज का तूफान रोज रोज की सफाई  कौन देता फिरता होगा व कब तक  ऐ प्रभु।। उसके साथ वो बैठा ये बोला वो बोला।। बुढापा की दहलीज पे दस्तक देता हुआ  फिर भी अनेको सवाल अनेको व्यंग्य वाण अनेकों परिक्षा देते चलो सवाल पे सवाल।। आखिर कब तक व क्यों ये सवाल तब तो अकेला वाला जीवन ही अच्छा था प्रभु ना कोई प्रश्न ना कोई व्यंग्य वाण ना कोई आशा ना कोई निराशा एकदम शांत वाला जीवन था तब पौधों से दोस्ती किया कोई सवाल ...

एक दोस्त

 दोहज़ार दो में मिला था एक बन्दा  लाल गमछा लपेटे पढ़ने की सनक लिए मुझे भी प्रेरित करता रहा किंतु मेरा  मन नही रम पाया पुनः उस पढ़ाई में रहे होंगे अलग अलग वजहें।। तब चार सौ वाले कमरे में रहता था मैं होस्टल में तब रहता था ।। समय चलता रहा वो डिग्री पे डिग्री लेता रहा एक लड़की से इश्क़ में हारा हुआ भूलने की एक तडप थी तब उसके दिलोदिमाग में ।। प्रतिरोध वश कुछ कर गुजरने की एक सनक  मैं भी कमोवेश ऐसे ही दर्द से निकला यहां था आया छोटी तनख्वाह मिला करता था तब के दिनों पांता भात खाता बहुत था उन दिनों वो।। लड़ता रहा चिठी पे चिठी लिखता रहा  अपना हक पाने की खातिर आफिस में काहे का कोई सुनवाई उसका।। डिग्री पे डिग्री लेता रहा आगे चलता रहा  एक बार पढ़ाई से विमुख फिर कभी नही हो पाया फिर शादी देखने कटक मुझे भी लेके गया इस बीच बहन को भी नॉकरी दिलाया लड़की देखा हुआ सबकी रजामंदी हुई अपनी भी पढ़ाई करता आगे बढ़ता रहा मैं तो अपनी दुनिया खुद से कल्पित करता रहा आज मैनेजर बन गया वो कई लोग उसके अंडर मैं अपनी दूसरी दुनिया मे कल्पित बढ़ता रहा  समयाभाव खातिर नही मिल पाता ज्यादा  अब उन दिनों ...

हीरा

 अपनी नजरों से पूछ लेना तुम हीरा हो क्या  यदि हां में जवाब मिल जाये तब समझो वही  असली शुद्ध स्वाभिमानी जीवन है।। मैं अपने मन का हीरा हु... औरो से क्या पूछूंगा जब मेरा मन मेरे साथ हो चमकते दमकते चलते रहना जीवन मे केवल जोहरी ही जानता है हीरा की होती क्या कीमत है अपना मन ही जोहरी है इस हीरा की खातिर यदि मन दहाड़ दहाड़ के बोल रहा हो हीरा  अच्छे काम अच्छे मन से सदा चलना चाहिए साफ नियत व खुले विचार भी है जरूरी बस किसी और को जोहरी ना लेना समझ अपना मन कभी बेईमान जोहरी ना होगा अपना सही आकलन वही कर पायेगा तब क्या सोच क्या विचार।। यहां फेंको या वहां फेंको कोई फर्क नही होनेवाला हीरा तो होत हीरा यहां हो या वहां।। खुद को खुद की कसौटी पे कस के परखो यदि मन बोले कि तुम हीरा हो तब सही में हीरा हो। अपनी चमक सदा बिखेरते रहना।। जियो शान से निज की जिंदगी ऐ राहगीर  ये जीवन तुम्हारा है तुम्हारा ही रहेगा  औरों को तभी सुनो जब मन इजाजत दे   गांधी को भी पढ़ो नेहरू को भी  सबको पढ़ना किताबों में या जीवन मे  किन्तु अपने आप को पढ़ना व समझना ना भूलना  अपने मन का गांध...

निडर व साहसी

 सत्यपथ पे चलनेवाले जीवन के जांबाजों जब तक इस पथ पे तुम्हारे कदम चलते रहेंगे ना कोई डर ना कोई भय करने की जरूरत निडर व साहसी बन कदम पे कदम चलते रहना कोई माई का लाल बाल भी बांका ना कर पायेगा अपनी नजरो में ही खुद से जांबाज़ बनते जाओगे।। ऐ ईमानदारी की डोर संभालने वाले जांबाजों छोटा सुंदर जीवन देके प्रभु ने भेजा होगा इस जहां में काहे का भय जब हो तुम्हारे कदम ईमानदारी पथ पे सिंह की दहाड़ लिए गर्जना करते रहना जांबाजों बेईमानो की क्या मजाल जो इन जांबाजों को छुवे अपनी नजरो का हीरो बन दहाड़ते रहना।। आज जब कुछ देखता हूँ तब पिताजी की बातें  याद आती बहुत है।। निडर बन चलना सब पिताजी की विरासत है जो जीवन अपनी मर्जी वही अपना जीवन है डर डर के जीना भी क्या कोई जीना है।। विनम्रता की भी अपनी सीमा एक रखना किंतु आग व मशाल भित्तर जलाए रखना प्रभु की आंखों से कौन बच पाया है ।। प्यार मोह्हबत से पेश आना कोई कमजोरी नही होती ये उनकी समस्या होगी जो इसको कमजोर समझ  लेने की भूल कर रहे होंगे।। प्यार मोह्हबत अहिंसा से तो हमारा देश आजाद हुआ था शक्तिशाली अंग्रेजी हुकूमत को हमारे पूर्वजों ने ही भगाया था अरे सत्...

सर का जन्मदिन

 ये मशीन वाले जमाने मे भी एक मीठी हंसी वाले लोग का मिलना भी क्या खूब है।। सरल स्वभाव व मधुर वाणी से लबरेज.. एक अपने बॉस का जन्मदिन को मैं  यूं ही याद करना चाहूंगा।। वैसे ही हंसके मिलना बात करना  वही सुनने की लाजवाब कला आज भी अभी मिस्टी मिला तब याद आया आज  सर का जन्मदिन है शायद हो गए हम  मशीन है पलभर को ऐसा लगा।। बिस सालों से वही आवाज़ वही अंदाज़ समोसा खाया मिठाई भी खाया  यादों के पिटारा में यादों को खोज रहा फिर घूम फिर वही हंसी वही मुस्कान मेरे को मिल रहा।। रही होंगी बहुत सारी खट्टी मीठी बातें किंतु घूम फिर वही सरल स्वभाव  मन मस्तिक में याद आ रहा है ।। एक आम कर्मचारी प्रधान इस संस्थान का  यादों को समेट रहा है व  सर के जन्मदिन  को ढेर सारी शुभकामनाएं जुटा रहा है।। कभी सेंट्रो तो कभी हौंडा सिटी वाले ये सर को जन्मदिन की ढेर सारी बधाइयां।।