मेरा बचपन मुझे लौटा दो!!
मेरा बचपन लौटा दो हे प्रभु!! हाथ में चाय किन्तु मन बहुत दूर बचपन के पलों को मानो खोज रहा हो वर्तमान से विरक्ति या बचपन के अल्हड़पन से लगाव वाले पलों को मन या यूं कहो मैं याद कर रहा हूं आज !! हे भगवान हे प्रभु मुझे मेरा बचपन लौटा दो!! ढकाइच से भोजपुर का वो छोटा सड़क हिलोरे देती वो बड़ी बड़ी बसें दस पैसा भाड़ा और संत जोसफ स्कूल वहां का अनुशासन और अपनापन खाली समय में कभी वो कांच की गोलियां बाहर बिकते चालीस पैसा वाला तब का केक आज भी याद है...... संतोष रवि भूषण प्रियंवदा सुनील जयंत राकेश सुरेश भारती और अनेकों दोस्त !! वो मस्ती और आज की मस्ती..... काश वो बचपन कोई लौटा देता सभी दोस्तों से उस रूप में मिल पाता लुना loureto आयरिश सिस्टर्स और उनकी क्लाससेज की बात राजीव और चन्द्रशेखर की नूरा कुश्ती घर लौटते ही समय से लालटेन जला पढ़ने बैठ जाना समय से..... बसंत बाबा पहली बार अँग्रेजी की किताब पढ़ना सिखाये!! परमेश्वर की कक्षाएँ गाँव के पश्चिम छोर पर गाँव का माहौल तब आपस में एक लगाव सा आज मशीनीकृत सा द...