निडर व साहसी

 सत्यपथ पे चलनेवाले जीवन के जांबाजों

जब तक इस पथ पे तुम्हारे कदम चलते रहेंगे

ना कोई डर ना कोई भय करने की जरूरत

निडर व साहसी बन कदम पे कदम चलते रहना

कोई माई का लाल बाल भी बांका ना कर पायेगा

अपनी नजरो में ही खुद से जांबाज़ बनते जाओगे।।

ऐ ईमानदारी की डोर संभालने वाले जांबाजों

छोटा सुंदर जीवन देके प्रभु ने भेजा होगा इस जहां में

काहे का भय जब हो तुम्हारे कदम ईमानदारी पथ पे

सिंह की दहाड़ लिए गर्जना करते रहना जांबाजों

बेईमानो की क्या मजाल जो इन जांबाजों को छुवे

अपनी नजरो का हीरो बन दहाड़ते रहना।।

आज जब कुछ देखता हूँ तब पिताजी की बातें 

याद आती बहुत है।।

निडर बन चलना सब पिताजी की विरासत है

जो जीवन अपनी मर्जी वही अपना जीवन है

डर डर के जीना भी क्या कोई जीना है।।

विनम्रता की भी अपनी सीमा एक रखना

किंतु आग व मशाल भित्तर जलाए रखना

प्रभु की आंखों से कौन बच पाया है ।।

प्यार मोह्हबत से पेश आना कोई कमजोरी नही होती

ये उनकी समस्या होगी जो इसको कमजोर समझ 

लेने की भूल कर रहे होंगे।।

प्यार मोह्हबत अहिंसा से तो हमारा देश आजाद हुआ था

शक्तिशाली अंग्रेजी हुकूमत को हमारे पूर्वजों ने ही भगाया था

अरे सत्त्यपथ पे चलनेवाले जाबांजो।।।

खुश हो जाने दो कुछ पल खातिर उन्हें भी 

बस अपनी मंजिल को मन मे बसाए चलते रहना।।

ईमानदार पथ पे निगाहे गड़ाए आगे चलते रहना।।




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