एक दिन

 एक दिन आएगा जब मेरे को ना पाओगे

जब हम जुदा हो जाएंगे मेरे को ना पाओगे

केवल फ़ोन को निहारोगे किंतु मेरा कोई पैगाम 

ना पाओगे।।

यादों के झरोखे से ही मुझको देखोगे।।

तब ना कोई रूठना ना कोई मनाना होगा 

ना कोई गिला ना कोई शिकवा होगा तब।।

मेरी गलियां मुहल्ला को देखोगे तब हमारी 

यादें बहुत आएंगी किंतु मेरे को नही पाओगे।

दो पल के इस जीवन को जी लो दिल खोल के

क्या रूठना क्या मनाना क्या बिश्वास क्या अविश्वास।।

बहुत सारे ऐसे जो जुदा हो चले गए ।।

कभी लौटके फिर ना आये।।

स्वार्थ परमार्थ की खोज बिन में इतना घुल ना जाना

मन तो आज़ाद ही आता है इस जहां में

उसको कैद करने के बहाने क्यों खोजते हो।।

क्या बोला क्या किया क्या पाया क्या खोया

इस सोच को अलविदा कर लेना दोस्त।।

एक दिन ऐसा आएगा जब जुदा हो जाएंगे

फिर कभी ना मिल पाएंगे।।

जो आहसास  आता हो मन को 

खूब मन भर जी लो उनके संग ।।

ज्यादा डूबना ना जीवन के उस रंग में ।।

मन को आनंदित कर लो जितना कर सको

जी लो असल जीवन  रिश्तों संग।।








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