एक साल और जीवन के रंग बदरंग
मनुष्य का जीवन एक गाड़ी के समान है जो बहुत तेजी से हमलोग चलाते रहते है...किन्तु सोचिए जब आपकी गाड़ी का ब्रेक कोई और लगाने को मजबूर कर दे!
कुछ ऐसा ही हमलोगों के जीवन मे हुआ...पिछले साल अक्तूबर में मैं पत्नि बेटी और बेटा गुजरात के लिए रवाना हुए पूजा की छुट्टियों में...सूरत में ससुराल वालों के वहां रुकना हुआ फिर वहां से traveller गाड़ी से द्वारका bet द्वारका सोमनाथ मन्दिर और बहुत सारे जगह घूमना हुआ....दस लोगों का समूह और घूमने का आनंद का क्या ही कहना!
इसी बीच बेटा को खांसी हो गया...डॉक्टर से दिखा के दवाई का बंदोबस्त किया गया....सताईस अक्तूबर वापसी था.....बेटा को बुखार भी शुरु हुआ आना....28th को देर रात पहुचे हमलोग कोलकाता....29th को डॉक्टर से दिखाए....टेस्ट हुआ डेंगू निकला....प्लेटलेट्स 1.55L था....30th अक्तूबर 70k प्लेटलेट्स तब मेडिका मुकुंदपूर में भर्ती करवाया गया बेटा को.....इलाज चालू......ब्लड टेस्ट हुआ जिसमें लीवर में बहुत इन्फेक्शन का बात डॉक्टर ने बोला! डॉक्टर निकोला के supervision में इलाज चल रहा था...बार बार बोलती रहीं समय लगेगा किन्तु ठीक हो जाएगा!!
किन्तु हमलोग भाग्यशाली नहीं थे या medica का इलाज compromised था या डॉक्टर निकोला सक्षम नहीं थी नहीं मालूम....वो मनहूस घड़ी 5th नवंबर 23...दोपहर जब हमारा हीरा जैसा बच्चा हमलोगों को छोड़ चला गया इस दुनिया से....डॉक्टर निकोला I m sorry बोलकर मानो दुखों का पहाड़ ही मेरे परिवार के उप्पर डाल दिया...सबकुछ खत्म....घटना के बाद कई प्लेटफॉर्म पर शिकायत करने का भी हुआ अस्पताल के खिलाफ किन्तु अफसोस कोई प्लेटफॉर्म नहीं जहां आप मेडिकल negligence या compromised treatment का शिकायत दर्ज करवा पाएँ....वेस्ट बंगाल क्लिनिकल establishment कमिशन को mediating krte हुए भी देखा ऑनलाइन hearing में.....फिर वेस्ट बंगाल मेडिकल council को शिकायत किन्तु इनलोगों ने हाथ ही खड़ा कर दिया ये कह्ते हुए कि इनको कोई अधिकार ही नहीं है किसी प्राइवेट अस्पताल या नर्सिंग होम के खिलाफ जांच करने का.....एक तरफ जिंदगी के अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद वही मन को शांत हेतु शिकायतों का सिलसिला भी चला!! अंत में स्वास्थ्य मंत्री वेस्ट बंगाल को मेल भेजा गया सारे डॉक्युमेंट्स के साथ किन्तु कोई ज़वाब भी नहीं आया कदम उठाने की बात तो छोड़ ही दीजिये!!!
शुक्रिया उन तमाम शुभ चिंतकों का जिनकी बदौलत हम खड़े रहे और जुनून नए रास्ते बनाने का करना जारी रखे.....बीस दिनों की वज्रपात झेलने के बाद मैं और पत्नि सीधे डॉक्टर की निगरानी में टेस्ट और आगे बढ़ने का जुनून में लग गए.....कैसे जिंदा रहना है यही सवाल था...अस्तित्व का ही संकट आ खड़ा हो गया.....कितना शानदार जीवन रूपी गाड़ी था और आज अस्तित्व का संकट! किसी ने ठीक ही कहा ये जीवन हमलोगों का है ही नहीं कब break भगवान का लग जाये कोई नहीं जानता किन्तु भागती-दौड़ती जिंदगी में हमलोग सोचते नहीं कि ऐसा भी करवट जीवन की गाड़ी ले सकता है....फिर क्या था पूजा पाठ का सिलसिला और डाक्टर की निगरानी में हम दोनों का जुनून आगे बढ़ता रहा.....बदहवास दोनों मानो कुछ हासिल किए बिना रुकनेवाले नहीं थे....
फिर क्या था पत्नि को गर्भ ठहर गया....घरेलू नुस्खे हो या पूजा पाठ का जुनून खोए बच्चा को पा लेने को मन निरन्तर बेचैन.....twin pregnancy था...खतरे भी बहुत किन्तु जुनून और सतर्क भरे कदम से सब ठीक रहा....भागीरथी neotia newtown बुक हो गया....एक एक दिन का इंतजार मानो सालों जैसा महसूस होता....बीच बीच में हीरा जैसे बच्चे को खोने की तड़प पीड़ादायक थी...सही कहा गया है बच्चा खोने से बड़ा दर्द मनुष्य जीवन मे कुछ भी नहीं है!!
अंत में लड़ते लड़ते 23rd September भी आ गया....पत्नि अस्पताल में भर्ती हो गयी.....मन फिर भी बेचैन क्या होगा...खोया बेटा की जगह एक बेटा भी आएगा क्या या दो बेटियाँ ही होंगी....कुछ भी नहीं मालूम था.....भगवान पर भरोसा करके मन खुद को शांत करने की कोशिश करता रहता....हम दोनों आपस में सदैव बात करके एक दूजे को साहस देते रहे.....करीब चार बजे शाम को डॉक्टर दिखाया और बोला दोनों बेबी boy हुआ है....देखिए और फोटो ले लीजिए......एक पल को लगा कोई स्वप्न देख रहे या हक़ीक़त में ऐसा हुआ है....फिर शुभ चिंतकों का फोन मन को और मजबूती देता रहा.....आज चौबीस दिन हो गया दोनों को जीवन में आए हुए.....
Ayansh Pradhan
Devansh pradhan दोनों का आगमन हमलोगों के जीवन में हो गया है.....5th नवंबर को एक साल होगा जिस दिन हमारी दुनिया ही मानो उजड़ चुकी थी!! आज एक और रंग से रूबरू होते हुए हम!!
ऐसा लगता है इस साल के भीतर जीवन के इतने रंग बदरंग देख लिए जो पूरे जीवन में नहीं देखे होंगे शायद....
कभी कभी अनायास ही दौड़ते जीवन मे रुकिए सोचिए और जीवन रूपी गाड़ी को चेक कीजिए पता नहीं कल ये दिन रहे ना रहे!!
मनोज प्रधान
किरन प्रधान
कोलकाता.....
अपना कोई प्रिया बिछड़ जाता है छोड़कर चला जाता है तो जिंदगी पहाड़ जैसी लगने लगती है जीवन एक बोझ हो जाता है आपने जिस हिम्मत से इस दुख की घड़ी को जिया वह दूसरों को प्रेरणा देगी जिंदगी से जद्दोजहद लड़ाई करके जीवन की गाड़ी को आगे कैसे बढ़ाना है इसकी प्रेरणा आपकी इस आत्मकथा से प्रेरणा मिलती है और फिर वह दुख भरा वर्ष भी खत्म हो गया नया साल नहीं खुशियां आपके जीवन में आई और जिंदगी की गाड़ी फिर हंसी खुशी से चल पड़ी इसी का ही नाम जीवन है अब परीक्षा की घड़ी खत्म अब भगवान आपकी जिंदगी में हमेशा खुशियां ही खुशियां दे यही ऊपर वाले से प्रार्थना है ।।आपका भीम शेखावत
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