माया मोह और जीवन

 बहुत सारे रंग है इस मानव जीवन के 

बचपन की अठखेलियाँ और अल्हड़पन 

लड़ते झगड़ते फिर प्रेम वाले पल!!

आँखों में सपने पाले बड़े होते हम मानव 

कभी ठोकर तो कभी सफ़लता की सीढ़ियां 

ना जाने कितने रंगो को देखते होते रूबरू 

फिर जवानी के खूबसूरत पलों से....

कितने सपने आते पूरे होते या टूट जाते 

शायद यही माया मोह का ये मनुष्य जीवन 

फिर गृहस्थ जीवन जिसमें होता फिर एक 

नया परिवार और नयी माया-मोह की बेड़ियाँ 

पहले के माया-मोह कम होते फिर नया माया-मोह 

अपने आगोश में कब ले लेता पता ही नहीं!

नयी ऊर्जा नयी प्रेरणा तो कभी ठोकर मिलती 

बहुत मुश्किल है समझना इस मनुष्य जीवन को!

तो कभी आपका प्राण ही प्रभु ले लिया करते है 

जिसमें अपना प्राण बसाया यदि वही प्रभु ले ले 

तब क्या होत इस मनुष्य जीवन का....

फिर भी जीना है चलना है इस जीवन में!!!


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