मेरे बाबुजी और आजादी

 रेडियो प्रधान के नाम से मशहूर मेरे बाबुजी 

अपने गाँव मे....

तब के दिनों में ख़बरें पाना और लोगों को 

बताना रहा होगा रेडियो नामकरण के पिछे 

ना डरना ना झुकना देखा उनको अपने जीवन में 

गांधी जी की बड़ी बड़ी बातें बाबुजी के मुख से 

स्वामी सहजानंदसरस्वती किसान नेता की भूरि भूरि प्रशंसा 

बाबुजी की मुख से बहुतों बार सुनने को मिला होगा 

तब की एक बात स्वामी जी की जो बाबुजी कह्ते थे 

ज्यादा खुश ना होना इस आती आजादी से 

गोरे अंग्रेज चले जाएंगे काले उसपे बैठ जाएंगे 

आज हालात देख ये बातें पता नहीं क्यूँ मन को 

आती और प्रश्न पूछती है.....

मेरे बाबुजी और ना जाने कितनों ने जो लड़ाई लड़ी 

क्या यही दिन देखने खातिर जो मणिपुर में दिखा 

या नित्य प्रतिदिन दिख रहा है आसपास ....

नफरत और जहर से भरता हुआ ये देश और लोग 

कभी जातीय कभी अधर्म के नाम पे....

झोपड़ी में रहते हुए शासक की परिकल्पना 

तब की और आज के शासक करोडों के 

जहाज में चलते हुए लाखो के कपड़े 

लाखो के चश्मा.....

क्या यही परिकल्पना रहीं होगी तब पूर्वजों की 

चोर बदमाश माफिया लोग नेता और शासक बन 

गुंडागर्दी और लूट खसोट ख़ज़ाने का करेंगे ऐसा!!

शिक्षा के नाम पे लूट और भ्रस्टाचार 

राजनीति में सेवा कब का हुआ गायब 

अब तो केवल पैसा कमाना रह गया उदेश्य 

जिधर देखता हूं उधर ही लूट खसोट और चोरी 

क्या सोचते होंगे अपने पूर्वज ये देख....

एक पूरी पीढ़ी ही नफरत से भर दी गयी है 

मानव होने का अस्तित्व ही खतरे में दिख रहा 

कभी कभी लगता मानो हम नर-भक्षी 

वाला समाज बनाने को व्याकुल!!!

यदि आज कोई गांधी पैदा हो जाए 

कब का ये नर-भक्षी नेता तमाम कर दिए होते 

सबको मारने मरने पे उतारू ये राक्षसी लोग 

इनका चरित्र किसी राक्षस से कम नहीं.....

रो रहीं होंगी पूर्वजों की आत्मायें जो बलिदान 

हुई होंगी आजादी खातिर!!!

आखिर क्या मतलब है आज इस आजादी का 

और एक नागरिक खातिर कर्तव्य की सीमाएं 

एक मानवतावादी देश या नफरत से भरे लफंगों का देश ...



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