इंसान हूँ

  ऐ धरती पे नफरत के सौदागरों जल्लादो

छोड़ दो हमें अपने हाल पे!

हम इंसान थे इंसान ही रहने दो 

दो हाथ दो पैर दो आंखें क्या काफी नहीं 

पहचान लेने को की हम इंसान है!

हम काले है गोरे है छोटे है बड़े है किन्तु हम इंसान है 

हम ब्राह्मण है या क्षत्रिय या पिछड़ी जाति का 

या यूक्रेन वाले या रूस वाले या अमेरिका वाले 

इंसान ही हमारी नस्ल है हैवानों!!

नहीं पता ये कुकी कौन या ये meity कौन 

इंसानों को इंसान ही बने रहने दो ऐ धरती के जल्लादो 

सत्ता की चाह में अंधे व लालची तानाशाहों 

इसी मिट्टी में मिल जाओगे तुम भी एक दिन 

क्यूँ इंसान को इंसानों से हो मरने मारने को 

उतावले बनाने की चाह में अंधे हुए जा रहे हो 

अरे हम इंसान ही थे इंसान ही रहने दो दो कौड़ी 

के नफरत से भरे हुए मानवता के दुश्मनों!!!

कोई धर्म के नाम पे कोई जाती के नाम पे 

कोई भाषा के नाम पे कोई क्षेत्र के नाम पे 

नफरत की असीमित युद्ध में धकेलने को बेताब 

कुछ तो शर्म कर लो नफरत के सौदागरों!

हम इंसान ही है इंसान ही रहने दो!!

माना तुम प्रेम का प भी नहीं जानते किन्तु 

प्रभु ने सबसे पहले प्रेम करुणा व मानवता ही 

भेजा होगा इंसानों के साथ इस धरती पे!!

इंसान ही है इंसान ही रहने दो मक्कारो !

Comments

Popular posts from this blog

श्रद्धांजलि

मनुष्य जीवन

Me and Guddu pundit