शर्मिंदा हूं

 आँखों में आँसू लिए बैठे सोच रहा हूँ 

दर्द की असीमित पीड़ा झेल रहा हूँ 

वैसे चारो ओर हिंसा का नंगा नाच 

कोई नयी बात नहीं!!

किन्तु मणिपुर की आज की तस्वीर देख 

केवल सोच रहा हूँ दर्द झेल रहा हूँ 

किसी के घर की बिटिया होगी किसी की बहना होगी!!

अरे हैवानों किसी की लाडली होगी 

ये नग्नता मानवता को शर्मसार करनेवाली 

आज शर्मिंदा हूँ कि मैं भी एक कतरा हूँ 

इसी समाज का!!

एक दूजे के खून के प्यासे कैसे है ये 

कैसे आज के नंगे हमारे ये हुक्मरान है

अरे नफरत बांटते हुक्मरानों क्या हिसाब दोगे 

उप्पर वाला जरूर देख रहा होगा....

भगवान राम का नाम और रामराज्य कहते नहीं थकते हो 

किन्तु ऐसी भयानक मानवता को शर्मसार करती तस्वीरे 

शर्मिंदा हूं मैं किंतु!!

निर्लज्ज हो चुके हमारे हुक्मरान 

सत्ता की चाह में अंधे और हिंसक मनोवृत्ति वाले 

हमारे आज के सच मे अनपढ़ राजाओं की जमात!

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