क़लम और ज़ज्बात

 मेरी कलम भी वाकिफ़ है मेरे जज़्बातों से 

नफरत भी लिखने की कोशिश कर्ता हूं किन्तु प्रेम और मोहब्बत ही लिखा जाता है !

सतही और हल्की बातों पर लिखना या व्यक्त करना बातेँ मेरी कलम को भी मंजूर नहीं !!

फिलहाल जिंदगी की जद्दोजहद में आगे की बड़ी लकीर खिंचने को बेताब मेरी कलम!!

मेरी कलम भी वाकिफ़ है मेरे जज़्बातों से 

व्यर्थ की हल्की बातों पर मेरी कलम भी मना कर दिया करती है लिखने से!

चिंगारियों की एकमुश्त भंडारण है भीतर 

किन्तु वो बड़ी लकीर खिंचने वाली चिंगारियां है.....

किसी नफरत में डूबे वालों की बातों पर कोई टिप्पणी मेरी कलम भी मना कर दिया करती है...

शाबाश मेरी कलम!!

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