नफरत और झप्पी प्रेम का !
एक झप्पी दे देना दोस्तों जहां भी देख लेना नफरत में डूबे किसी भूले भटके राही को!
चाहे वो राही मोदी जी से नफरत कर रहा हो या केजरीवाल से या किसी से भी!!
याद दिला देना उस नफरत वाले को
अरे बेवक़ूफ़ तुम इंसान हो कहाँ भटक रहे हो....उसको थोड़ा देना झकझोर शायद होश में आ जाए उसका दिलोदिमाग !
झूठी खबरे देते देते उसका मस्तिष्क
बना दिया गया है ज़हरीला जैसा कभी हिटलर ने भी कर दिया था जर्मनs का....
झकझोर लो उसको जोर से बोलो तुम! इंसान हो बेवक़ूफ़ दो हाथ दो पैरों वाले
फिर ये नफरत क्यूँ और किसलिए!!
कभी जातीय गुमान सिर चढ़ता उसके तो कभी धर्म की झूठी श्रेष्ठता में डूबता वो अपना भुला भटका राही!!
जोर जोर से कानों में दियो आवाज उसके
तुम्हारी कोई बिसात नहीं ऐ भटके राही
एक छोटा Corona को ही कर लेना याद...
फिर भी जातीय अहंकार या धार्मिक अहंकार आ जाए तब इस अनंत ब्रह्मांड को ही देख लो भूलेराही.....प्रकाश और ध्वनि की रफ्तार को ही देख लेना
पृथ्वी से मंगल या सूर्य की दूरी को देख लो और फिर अपना कद काठी देख लो
एक चींटी से ज्यादा की बिसात है क्या....
ऐ भूले हुए नफरत के आकंठ में डूबे राही!!
उसको क्या होश ये राजनीति सत्ता और पैसे का मिलाजुला खेल होत है!
उस खेल की खातिर जहर नफरत का पीला पीला के उसको ज़हरीला बना दिया गया है!!
दोस्तो जहां भी देखो ऐसों को जोर का झप्पी जरूर देते जाय!!
प्यार का झप्पी है बहुत जरूरी!
हम तो ठहरे आम आदमी मेरा चश्मा भी आम आदमी वाला!!
प्यार मोहब्बत के सिवाय नहीं दिखता दूज कोय मुझे!!
झपकी नित्य प्रतिदिन देते रहना जहां भी मिल जाय!!
किन्तु झपकी से भी यदि वो नहीं ठीक होय तब छोड़ देना उसको उसके हाल!!
समय का चक्र ठीक कर देगा उस भूले राही को!!!
जब पेट और हाथ दोनों हो जाए खाली तब होश आवे जाय!!
कभी एक समय था जब बिहार में लालू
यही दिमागी खेल और जहर कुछेक के साथ कर दिया था खेला!!
पंद्रह साल लगे उस जहर को निष्क्रिय होते होते!!
किन्तु गलती से भी उससे ना कर लेना कोई बहस
क्यूंकि नहीं है वो अपने होश में!!
नफरत से प्रेम की दुनिया को उसको लाना है
तुरन्त एक प्रेम वाला झप्पी दे देना दोस्तों!!
अपने दिलोदिमाग को अपने साथ रखते रखते झपकी देते रहना दोस्त भटके पथिकों को.....
सुदर समाज तभी सुन्दर धरती साकार !!
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