मुर्ख मनुष्य


पल दो पल का ये जीवन है ऐ नासमझ मनुष्य...

भरपूर मोहब्बत खुद से खुद को कर लेना 

कैसा अहंकार कैसा घमंड कैसी इगो 

अपने भीतर ही खुश हो लेना 

अच्छे काम अच्छी सोच के साथ रहना 

कौन क्या सोचता ज्यादा ना सोचना 

खुद को अपने आईने में देख लेना 

क्यूंकि अपना मन सबसे बड़ा जौहरी होत है!

अपना आकलन करते किसी और से नफरत ना कर लेना ऐ मुर्ख इंसान !

ना ही अपने को भगवान समझ लेना 

और ना  ही बाकियों को बुरा इंसान !

अरे मुर्ख मानव खुद को प्यार करना जी भर!

दूसरों को उपदेश ना देना सदा 

अपनी सोच को इतना बड़ा रखना 

छोटी सोच या छोटी बातों की कोई जगह ही ना रहे!!

व्यंग्य करते करते दूसरों पर कहीं 

खुद की पहचान एक बुरे इंसान की ना बना लेना ऐ नासमझ मनुष्य!!!

व्यंग्य तभी तक ठीक जब तक अच्छा लगे 

किन्तु सदा व्यंग्य और व्यंग्यात्मक हँसी 

कहीं बुरा इंसान ना बना डाले!!


Comments

  1. पुरखों ने सच कही है बापू ,
    ‘स्वर्ग-नरक’ सब यही है बापू ,
    रुतबे-धन-सत्ता से बढ़कर ,
    कर्मों की एक बही है बापू ! Asharam 🙏

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