मेरे बाबूजी और आज

 भीड़ चाहे जो बन जाये तूफान इधर से उधर अपना रुख मोड़ ले ।।

जिसको जहर रोज रोज पीना हो पी लो

जितना जहरीला बनना हो बन जाओ

जितना नफरती बनना हो बन जाओ

किंतु मैं अपने मन बुद्धि की कसौटी पे

हर चीज को कसके परखूँगा फिर कुछ 

राय बनाके कोई विचार फिक्स करूँगा

नफरती बनना मेरे वश में नही

बाबूजी ने इंसान बनना सिखाया 

जाती धर्म से पहले इंसान बनना बेटा

प्यार मोह्हबत की खुशबू सदा बिखेरते रहना

हिंसा जैसी मनोविकृति से दूर ही रहना बेटा।।

बड़ी बड़ी बातें व संस्कार दिए मेरे बाबूजी ने।।

जीवन भर मैं अपने बाबूजी को ईमानदार जीवन इंसानियत   की भूमिका में जिसको देखा व जो मेरा आदर्श है आज भी हर पल हर वक्त व कोई भी

उस बाबूजी के बेटे को को नफरत का जहर नही दे पाएगा इस जीवन मे ।।


गलत को गलत व सही को सही कहने का ये इंसानी नजरिया ताउम्र साथ रहेगा।।

दो कौड़ी के चैनल्स की क्या मजाल जो मेरे बाबूजी के दिये संस्कारो पे हावी हो जाये।।

दो कौड़ी के ये व्हाट्सअप यूनिवर्सिटी वाले कुछ जहर का अंश भी नही दे पाएंगे 

इतना फौलादी मजबूत संस्कार देके गए मेरे बाबूजी।।

अपने बच्चों को भी इंसान बनना सिखाऊंगा नफरती नही।।

यदि मेरा पड़ोसी किसी नफरत के आगोश 

में आके आतंकवादी बन जाये तब क्या मैं भी वही आतंकवादी बन जाऊं।।

इंसान बनाके भगवान ने भेजा है इस धरती पे वही बना रहूंगा।।

मेरे बाबूजी सदा मेरे साथ थे है व रहेंगे

नही छोड़ पाऊंगा उनके संस्कार इस जीवन मे ।।।

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