भागमभाग

 चलते चलते इतना दूर आ गया हूं

क्या है ये जीवन अभी भी ना जान पाया हूं

रोते हंसते लड़ते झगड़ते चलते चलते 

कभी खुद से लड़ते कभी दूसरों से लड़ते

ये कर लूं वो कर लूं ये नही कर पाया

मंजिल जीवन की खोजते खोजते यहां तक 

सब यही छोड़ चले जायेंगे फिर भी भागमभाग

कुछ भी ना जाएगा यहां से फिर भी इतनी बेचैनी

इंसानी नस्ल के हमलोग फिर भी ये धर्म ये जाती

हम बड़ी जाती वाले तो हम बड़े ज्ञानी 

हद्द है हम इंसानो की कहानी

चलते चलते इतनी दूर आ गया हूँ

फिर भी ये जीवन को ना जान पाया हूं

जाना सबको है इस जीवन को छोड़के एक दिन

ये जानते हुए भी एक दूजे से इतनी नफरत

इतनी भागमभाग इतनी बेचैनी इतनी मायामोह

बहुतेरे अज्ञानी भरे पड़े है आसपास ऐसे।।।





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