इश्क़ व जीवन
अजीब दासता है इस जीवन की
ऐसा क्यों होता है कई बार होता है
अलग अलग पड़ावों पे होता है
क्यों किसी की निगाहों से तकरार हुआ करती है
पल भर इंसान वही क्यों रुक जाया करता है...
क्यों कोई किसी की मुस्कान में ही खो जाया करता है
ये क्या है व क्यों है ।।।
सौ बात की एक बात इश्क़ बार बार हो सकता है क्या
बहुतो से सुना था इश्क़ एक बार ही हुआ करती है
जवानी का इश्क़ नही हुआ तो कुछ भी नही
किंतु ये सिलसिला रुकता क्यों नही ..
किसी की निगाहों से टकराने व खो जाने का
माजरा क्यों व कैसे होत है।।
अजीब दासता है इस मानव जीवन का।।
किसी के नयनों व मुस्कुराहट में खोने का सिलसिला
क्यों व कैसे हो सकता है।।
पथिक ये जानते हुए भी की ये मेरा नही है
फिर भी उन नयनो व मुस्कानों में खोना क्या है
क्या यही इश्क़ होत है क्या ..किंतु क्यों
ये मन इतना जिद्दी क्यों होता है इंसानो का।।
ऐसा लगता सारे संकट का मूल ये जिद्दी मन है
बचपन जवानी व बुढापा तीनो ही काल मे
ये जिद्दी मन बच्चों सी जिद्द क्यों करता है
कभी किसी की नयनो में खोने को कहता है
कभी किसी के चेहरे को मन से देखते रहने को
ऐसे इस जिद्दी मन को वश में रखना कठिन काज
किंतु जो इस जिद्दी मन को वश में किया वही
होत सिकन्दर है इस जहां का ।।
जो भी सत्य हो किंतु पल भर उन आंखों में
उन मुस्कानों में उस चेहरे में खोना भी क्या खूब
अजीब आनंद की अनुभूति सी होती हुई
मन से मन को मन के भित्तर भी इश्क़ होत है।
आंखों में डूब के भी इश्क़ होत है।।
स्वप्नों में भी इश्क़ होत है खुली आँखों से भी ।।
वाह रे इश्क़ की लीला इस जीवन मे।।
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