मीठी यादें

 मीठी यादें

वो भी क्या दिन हुआ करता था

मीठे प्यारे लगनेवाला वो एक साल

फिदा थी एक लड़की नाम जिसका अंजू

देखके मुस्कुराना व फिर शर्माना

वो अल्हड़ मस्ती सी हंसी व अदाएं

शिक्षक आते कक्षा में फिर भी एक 

नजर जरूर मिल जाया करता था 

नई साईकल लेके दिखाने की वो ललक

अपनी ओर आकर्षित करने की अजीब 

सी एक सनक हुआ करती थी तब

जब हम कक्षा बारह में पढ़ा करते थे।।

अभी भी याद है किसी ने टोका था उसको

क्या शादी करोगी क्या उससे जिससे नैनो का ये खेल चल रहा है।।

उन मीठे पलों की महक की बात ही कुछ और थी।।

ये पल भागमभाग का वो पल कुछ और ही हुआ करता था तब।।

वार्षिक परीक्षा में अवल आने पे मेरे पुरस्कार वाले दिन क्या चमक थी अंजू के चेहरे पे।।

समय का क्या किंतु ये खट्टी मीठी यादें ही जो अटूट बन संग रह जाती है।।

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