जीवन रस

 सात नवंबर जन्मदिन वाले  फ्लैट में यादों व लम्हो को सहेज रहा हूँ।।

चारों ओर शोरगुल भागमभाग में भी

एक पल अपना खोज रहा हूँ।।

कौन कहाँ आता बैठता था उन पलों को

कैसे मिलना जुलना हंसी ठिठोली हुआ 

करता था तब उसको सहेज रहा हूँ।।

कौन कौन से वो पल थे जो देते गए शुकुन 

दिलोदिमाग को उनको समेट रहा हूं।।

कालितला के इस मुहल्ला की भाग दौड़

में भी कुछ अपना खोज रहा हूँ।।

अच्छे पल व यादें ही जीवन रस देती है।

बुरे पल तो सपने जैसे भुला दिया करता हूँ।।

अच्छे बुरे उन लम्हो में भी कुछ पल 

अपना खोज रहा हूँ।।

अरे दोस्तों क्यों सोचते हो नकारात्मक 

सकारात्मक रूप से कुछ जीवन रस ले लो।।

कही और ना सही घर मे ही देख लो

जीवन साथी की आंखों को ही निहार लो।

हो सके तो कुछ पल खो जाना उन नयनों में।।।क्या अच्छा क्या बुरा भूल जाओ थोड़े पल खातिर।।।

इश्क़ हो या मोह्हबत की उन यादों को ही

तरोताजा कर लो दोस्तों।।

कभी डूबके देख लो उन मीठी मुस्कानों को उन प्यारी आंखों को उन अदाओं को।।

जिसपे कभी तुम लट्टू हुआ करता था।।

समय के साथ जरूर बदल लेना खुद को

नही तो समय ही बदल देगा हमसबको ।।

घर के बाहर भी यदि कोई नयन भा जाए

यदि किसी की मुस्कुराहट एक छाप

छोड़ जाए तब उसमें भी दो लाइन लिख के जीवन रस ले लेना दोस्तों

बस जीवन रस लेना ना भूलो।।

पलों को सहेजना समेटना ना भूलना

चारों ओर प्रभु ने सुंदर व सुंदरता को

बिखेरके रखा है हमलोगों बीच

अपना अपना पल समेट लेना दोस्तों

ना अपने को शुष्क पड़ने देना कभी

ये जीवन रस है बहुत जरूरी जीने खातिर

ये पल वो पल है बहुत जरूरी ।।।

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