मन की शंकाएं

 मेरे गाँव मे एक इंग्लिश टीचर थे जो अब नही रहे।।बहुत सटीक उदाहरण दिया करते थे।।

'काहे कलिहा बोरा के नीचे दबाइल जातर'।।कभी कभी सोचता हूँ बड़ा सही उदाहरण था और है भी।।।बहुत समय हमलोग कुछ ऐसा काम करते है जिससे कुछ आनी जानी तो है नही या कुछ मिलनेवाला नही है फिर भी करते है पता नही क्यों।।या तो स्वभाव वश विवश है या कुछ करने की कोशिश करते है लेकिन खाली बोरा के नीचे दबने जैसी हालत में खुद को पाते है।।लेकिन मेरा मानना है इंसान को इससे हताश नही होना चाहिए।।पूरा विश्वास उस प्रभु पे रखना चाहिए जो इस जीवन को कहीं ना कही नियंत्रित करता है या एक्टिंग करवाता है हमलोगों से।।मन की साफगोई व पवित्रता बहुत मायने रखता है ऐसा मैं मानता हूं।।दूसरे लोग क्या सोचते है इससे ज्यादा जरूरी है हम क्या सोचते है खुद के बारे में।।मेरे पिताजी बचपन मे बार बार बोला करते थे हमारे स्वक्छ  विचार और अच्छे कर्म ही तो जीवन है।।जिसकी गरिमा हमलोगों को बनाये रखनी चाहिए।।बहुत समय अपने लाभ या हानि की चिंता किये बिना हमे खाली बोरा के नीचे दबने जैसे काम भी कर लेने चाहिए बशर्ते उससे हमारे कर्म किसी के लिए उद्देश्य पूरे करते हुए प्रतीत होते हों भले ही खुद को उससे कुछ भी हासिल हो या नही।।

ऐ दोस्त सकारात्मकता है बहुत जरूरी इस  जीवन मे।।

मन की पवित्रता व काम की प्रव्रीति भी 

यदि मन को आनंद मिलता हो तुम्हारे

खाली बोरा के नीचे दबने से भी तब

बार बार दबना इसके नीचे मेरे दोस्त

खुद के लिए ना सही किसी और के लिए

कुछ तो काम बनता होगा ऐसा सोचके

बार बार दोहराना इसको जीवन मे।।

अडिग मन की निश्छल कर्तव्यपरायन्ता

है बहुत जरूरी जीवन मे।।

मन का आनंद ही तो जीवन है

अर्थ को ना देखो मेरे दोस्त।।

मन को आनंदित खातिर ही 

बार बार खाली बोरा के नीचे दबते रहना

होता होगा किसी और का काम तो

जरूर करते रहना।।

लोग जरूर सोचते होंगे क्यों ये करता है ऐसा।।

होगा जरूर इसका कोई मकसद इससे

जरूर कोई लाभ होगा इसमें इसका

फिर भी निडर निर्भय हो चलते जाना 

अपने पथ ऐ दोस्त।।

तुम्हारा हिस्साब तो कोई और रख 

रहा होगा ये सोच मन मे चलते रहना

बार बार खाली बोरा के नीचे दबते रहना।।

अपने खातिर ना सही दूसरों की खातिर ही सही बार बार ऐसा करते रहना।।

Comments

Post a Comment

Popular posts from this blog

श्रद्धांजलि

मनुष्य जीवन

Me and Guddu pundit