कशमकश जीवन का

 एक वो पल और एक ये भी पल।।।

मस्त बाल लीला में मग्न मुग्ध 

वो महुआ का पेड़ जामुन का फल

आमो के साथ बीते वो सुंदर पल

कभी गुल्ली डंडा का वो खेल

छुपा छुपी वो खेल  पुआल के बीच

कांच की वो गोलियां दोस्तों के संग

खेतों में वो बिता हुआ पल

नंगे पावँ गायों को भगाता खेतों से

तो कभी नीलगायों को दौड़ाता

चना के खेत से वो होरहा बनाता पल

जीवन के वो पल भी क्या खूब थे।।।

भागती दौड़ती जिंदगी ना थी।।

सुकून हुआ करता था मन मे तब।।

परमेश्वर कुम्हार की वो ट्यूशन वाले पल।।

तो कभी बहन के साथ झोला लेके

दौड़ते आमों के बागीचे का दृश्य।।।

कल की ही बात हो जैसे।।।

जीवन के वो अनमोल पल।।।

गमछा गले मे डाले वो पल।।।।

गमछे में वो मां का दिए मुरी दाना

क्रिस्चियन स्कूल डुमराव के वो पल

संतोष और रविभूषण का संग

सुनील जयंत और अनेको दोस्त।।

सिस्टर और मिस के वो प्यारे क्लास।।

दस पैसे का सफर घर से स्कूल।।

वो खुसी जब वो दस पैसे बच जाते।।

छोटी छोटी खुशियों के वो पल।।

बाबूजी बड़का बाबूजी और चाचा का 

छत्रछाया वाला डांट वाला वो पल।।

एक वो पल और एक ये पल।।

दौडती भागती आज के ये पल।।

एक के बाद एक पल तैयार हो जैसे

भागने को तैयार हो जैसे।।।

ये काम ये घर ये किराया ये पैसा।।।

कशमकश के बीच मे पिसता आज 

ये पल ।।।

सब कुछ होते हुए भी खाली ये पल।।

कुछ नही होते हुए भी भरे हुए वो पल।।

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