भक्त चश्मा :निदान
वैसे तो आजकल मैं साहित्य के नजरिये से खुद को या जीवन को समझने की कोशिश कर रहा हूँ।किसी भी तरह के विशेषकर राजनीतिक बहसबाजी में नही अपनी ऊर्जा खर्च करना चाहता।।जो मन मे आता है उसको लिखके मन को हल्का करने की कोशिश करता हूँ।।अपने तो भाई गृहस्थ जीवन की जिम्मेदारियों को निभाने में ही लगे है।।फिर भी आप इतना पूछ रहे है तो बोलना होगा।।मेरे हिसाब से भक्त चश्मा कहाँ से मिला है कौन दिया है ...बड़ा कठिन सवाल है।।मेरे हिसाब से पिछले कुछ सालों से स्लो जहर के रूप में ये लोगों को चुपचाप पहना दिया गया है और पहनने वाले को मालूम ही नही है ये कब कैसे या ऐसा कुछ हुआ भी है।।लेकिन इसका निदान दो तरह से संभव है।।हिन्दू मुस्लिम के सोच से या पाकिस्तान और बांग्लादेश के तुलनात्मक सोच से उप्पर उठना होगा तब दिखाई देगा कि पेट्रोल का दाम अब सौ के उप्पर हो चुका है।।बासठ प्रति लीटर पे बैलगाड़ी से चलने का ड्रामा रोड पे करनेवाले आज क्यों शांत है ये दिखाई पड़ेगा।।चार सौ में गैस महंगा दिखनेवालों को आज नौ सौ का गैस सस्ता दिखता है क्योंकि भक्त चश्मा उनको पहना दिया गया है।।एक और तरीका से ये भक्त चश्मा से निजात मिलेगा....जब इनके पेट पे व्यवस्था का अटैक होगा ...जब घर चलाना मुश्किल हो जाएगा।।पॉकेट में एक अठन्नी भी जब नही रहेगा तब ये भक्त चश्मा अपने आप गायब हो जाएगा।।
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