उलझन
जीवन और कुछ भी नही
प्यार का नगमा है ....
रिश्तों की अनगिनत कहानी है
कितने पतझड़ आये और चले गए
कितनी ठंढ रातें आयी व चली गयी
बचपन क्या था कहाँआ गए अब
जवानी की वो प्रेम कहानियां
आज कहा होंगे वो सभी लोग
नफरती कल भी थे आज भी है..
जीवन और कुछ भी नही
माया मोह की अनवरत लीला है
रिश्तों की कहानी है ....
दौड़ते व चलते रहने का नाम है
ये जीवन....कुछ खोकर कुछ पाने
का नाम ही है जीवन।।।।
ये जीवन और कुछ भी नही
समय व काल चक्र का गाथा ही तो है
कल कहाँ थे आज कहाँ है कल कहाँ होंगे.....
काल के गाल की चक्र कहानियां ही
यादों के लम्हे ही तो जीवन है....
ये जीवन और कुछ भी नही
प्यार व समय की गाथाएं है।।।
शुक्रिया
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